2025 EAT-Lancet Commission —
2025 में प्रकाशित EAT-Lancet Commission की नवीनतम रिपोर्ट ने वैश्विक खाद्य-प्रणालियों पर व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन पेश किया है और कहा है कि वर्तमान खाद्य-प्रणालियाँ न तो लोगों के लिए पर्याप्त रूप से स्वस्थ हैं और न ही ग्रह के लिए टिकाऊ। रिपोर्ट में एक अद्यतन “Planetary Health / Planetary-safe” आहार का मॉडल पेश किया गया है, और कहा गया है कि यदि दुनिया व्यापक रूप से स्वस्थ, पौधे-प्रधान आहार अपनाए तो लाखों प्री-मैच्योर मौतें टाली जा सकती हैं तथा कृषि-जनित उत्सर्जन बड़ी दर से घट सकते हैं।
1. रिपोर्ट का उद्देश्य और स्वरूप
- यह एक बहु-अनुशासनीय (multidisciplinary) आयोग द्वारा तैयार वैज्ञानिक अद्यतन है जो पोषण, पर्यावरण, कृषि, नीति और सामाजिक-न्याय के पहलुओं को साथ में जोड़ता है। उद्देश्य: “स्वस्थ, टिकाऊ और न्यायपूर्ण खाद्य-प्रणालियों” के लिए वैज्ञानिक लक्ष्य और नीतिगत मार्गदर्शन देना।
2. मुख्य निष्कर्ष (Key findings)
- स्वास्थ्य लाभ और प्राण-रक्षा: रिपोर्ट अनुमान लगाती है कि विश्व स्तर पर अधिकांश लोग ऐसी आहार संरचना से दूर हैं जो दीर्घ-कालिक रोग (दिल की बीमारियाँ, टाइप-2 डायबिटीज़, कुछ कैंसर) और प्री-मैच्योर मृत्यु को कम कर सके — और व्यापक परिवर्तन से सालाना लाखों प्री-मेच्योर मौतें रोकी जा सकती हैं (रिपोर्ट में ठोस आंकड़े दिए गए हैं)।
- पर्यावरणीय प्रभाव: खाद्य-प्रणालियाँ जलवायु-उत्सर्जन, भूमि-उपयोग, जैव-विविधता क्षरण, पानी के उपयोग और प्रदूषण पर महत्वपूर्ण दबाव डालती हैं; सही आहार-परिवर्तन और कृषि-प्रथाओं से कृषि से जुड़ा पर्यावरणीय दबाव घट सकता है।
- न्याय (Justice) को केंद्र में रखना: 2025 रिपोर्ट न्याय (food justice) को परिवर्तन का केंद्रीय उद्देश्य मानती है — अर्थात् पोषण, खाद्य-पहुंच, मजदूरों के अधिकार, और संसाधन-न्याय पर नीतियाँ जरूरी हैं।
3. “Planetary Health Diet” — क्या सुझाता है?
रिपोर्ट का आहार-ढांचा पौधे-प्रधान (plant-rich) पर आधारित है: सब्जियाँ, फल, साबुत अनाज, दालें/फलियाँ, नट्स, अनसैचुरेटेड तेल; पशु-जनित खाद्यवस्तुओं (विशेषकर लाल और प्रोसेस्ड मीट) का सीमित सेवन; अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य और अतिरिक्त शक्कर कम। यह लचीला है और स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक आहार और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप रूपांतरित किया जा सकता है।
4. पर्यावरण-लाभों के अनुमान
- रिपोर्ट और साथ की विश्लेषणों के अनुसार, यदि वैश्विक रूप से स्वस्थ-प्लांट-प्रधान भोजन अपनाया गया तो कृषि-क्षेत्र के उत्सर्जन और भूमि-उपयोग पर बड़े पैमाने पर कमी संभव है — कुछ स्रोतों का आकलन बताता है कि कृषि-उत्सर्जन आधे से अधिक घट सकता है और कई लाखों प्री-मेच्योर मौतें रोकी जा सकती हैं। (रिपोर्ट में स्वास्थ्य और जलवायु पर संभावित प्रभावों के परिमाण दिए गए हैं)।
5. नीति-सिफारिशें (मुख्य सुझाव)
- आहार मार्गदर्शन और सार्वजनिक स्वास्थ्य: राष्ट्रीय आहार-指南ों को वैज्ञानिक लक्ष्यों के अनुरूप अद्यतन करें; स्कूल-खानपान, खाद्य सब्सिडी और सार्वजनिक-खाना कार्यक्रमों में पौधे-प्रधान विकल्प सुनिश्चित करें।
- कृषि-प्रथाओं का रूपांतरण: उत्पादन-प्रणालियों में अधिक विविधता, पशुपालन-लागत और उत्सर्जन घटाने के उपाय (जैसे मिट्टी-स्वास्थ्य, स्मार्ट जल प्रबंधन, एग्री-इनोवेशन) अपनाएँ।
- न्यायपूर्ण संक्रमण (Just transitions): छोटे-किसानों, कृषि-श्रमिकों और सीमांचल समुदायों के अधिकार व आजीविका की रक्षा करते हुए परिवर्तन लागू करें—राशन, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता आवश्यक।
- बाजार और व्यापार-नीति: खाद्य प्रणाली में पारदर्शिता, ऑफ-पॉलिसीज़ (जैसे फूड-टैक्स/सब्सिडी-रिफॉर्म) और कंपनियों के पर्यावरण/स्वास्थ्य-प्रदर्शन पर नियमन ज़रूरी।
- उपभोक्ता-शिक्षा और सांस्कृतिक अनुकूलन: पाक-परंपराओं और स्थानीय खाद्य-संस्कृति के साथ मेल खाती सर्वसमावेशी संदेश रणनीतियाँ बनाएँ।
6. भारत के संदर्भ (निहितार्थ और सुझाव)
- खाद्य विविधता का लाभ: भारत की पारंपरिक भोजन-प्रथाएँ (दाल-चावल, सब्ज़ियाँ, बगैर ज़्यादा प्रसंस्कृत खाद्य) रिपोर्ट के लक्ष्य के अनुरूप हैं; इन्हें संरक्षण तथा आधुनिकता के साथ जोड़ना चाहिए।
- कृषि-प्रत्याशा और छोटे किसान: भारत में बड़े पैमाने पर छोटे और सीमांत किसान हैं — इसलिए कृषि-रूपांतरण के दौरान लक्षित सहायता (प्रशिक्षण, बीज, नये बाजार) अनिवार्य होगी।
- पोषण-सुरक्षा (nutrition security): जहाँ माइक्रोन्यूट्रिएंट-कमी और कुपोषण चुनौती है, वहाँ पौष्टिक-घने खाद्य पदार्थों (दालें, सब्जियाँ, नट्स) की उपलब्धता बढ़ाना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में पोषण-लक्षित सुधार करने होंगे।
- नीति-संरेखण: भारत के राष्ट्रीय आहार-गाइडलाइन्स, राष्ट्रीय पोषण मिशन और कृषि नीतियों को Planetary Health लक्ष्यों से जोड़ा जा सकता है—पर ध्यान रहे कि सामाजिक-आर्थिक विविधता का ख्याल रखा जाए।
7. आलोचनाएँ और चुनौतियाँ
- औद्योगिक विरोध: मांस और डेयरी उद्योगों से प्रतिकूल प्रतिक्रियाएँ अपेक्षित हैं—2019 के बाद की तर्ज पर विरोध और वैचारिक बहसें हो सकती हैं।
- व्यवहारिक क्रियान्वयन: स्थानीय खाद्य-रूचि, आर्थिक असमानताएँ, आपूर्ति-श्रृंखला और राजनीतिक इच्छाशक्ति—ये सब बाधाएँ हैं जिनका ठोस समाधान आवश्यक
8. निष्कर्ष (Conclusion)
2025 EAT-Lancet रिपोर्ट वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ प्रस्ताव करती है कि एक समेकित, पौधे-प्रधान और न्यायकेंद्रित खाद्य-रणनीति दुनिया को स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों में बड़ा लाभ दे सकती है। सफल परिवर्तन के लिए बहु-स्तरीय नीति, सामाजिक सुरक्षा और सांस्कृतिक अनुकूलन — तीनों की ज़रूरत होगी। भारत जैसे देशों में जहाँ पोषण-समानता और कृषि-आधारित आजीविका साथ-साथ हैं, वहाँ संक्रमण को न्यायपूर्ण और चरणबद्ध ढंग से लागू करना अनिवार्य है।







