India’s Largest Lithium-ion Battery Manufacturing Plant Inaugurated in Haryana
12:07 PMSeptember 5, 2025

India’s Largest Lithium-ion Battery Manufacturing Plant Inaugurated in Haryana

भारत के सबसे बड़े लिथियम-आयन (Li-ion) बैटरी निर्माण संयंत्र का उद्घाटन हरियाणा के सोहना में किया गया है। यह अत्याधुनिक प्लांट देश की इलेक्ट्रॉनिक्स एवं स्वच्छ ऊर्जा दृष्टि में मील का पत्थर है और भारत की आत्म-निर्भरता को नया आयाम देगा.

संयंत्र की मुख्य विशेषताएँ

  • यह संयंत्र हर वर्ष 20 करोड़ बैटरी पैक का उत्पादन करेगा, जो भारत की वार्षिक आवश्यकता (50 करोड़ पैक) का लगभग 40% है.

  • यहाँ बनी बैटरियाँ मुख्यतः मोबाइल, लैपटॉप, वियरेबल्स, हियरएबल्स (इयरबड्स, स्मार्टवॉच आदि) में उपयोग होंगी.

  • परियोजना केंद्र सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC) योजना के अंतर्गत स्थापित हुई है.

  • संयंत्र के द्वारा 5,000 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे और यह कुल 180 एकड़ में फैला है.

  • शुरुआती उत्पादन 2025 के चौथे क्वार्टर में आरम्भ होकर धीरे-धीरे पूर्ण क्षमता तक विस्तारित होगा.

लिथियम-आयन बैटरी क्या है?

  • यह एक प्रकार की रिचार्जेबल बैटरी है जहाँ लिथियम आयन नकारात्मक इलेक्ट्रोड (ग्रेफाइट) और सकारात्मक इलेक्ट्रोड (लिथियम-आधारित ऑक्साइड) के बीच गैर-जल विद्युत द्रव्य में गतिशील होते हैं.

  • ये बैटरियाँ उच्च ऊर्जा घनता (75-200 वाट-घंटा / किलोग्राम), लंबे चार्ज साइकिल, और हल्के व कम विषैले धातुओं की वजह से कारगर हैं.

लिथियम-आयन बैटरियों के लाभ

  • ऊर्जा घनता अधिक होने से कम जगह में ज़्यादा ऊर्जा संग्रहीत होती है.

  • हल्के और कम विषैले – पारंपरिक लेड-एसिड बैटरी की तुलना में काफी हल्की और पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं.

  • बेहतर प्रदर्शन – कम सेल्फ-डिस्चार्ज, अच्छी चक्र स्थिरता, कोई "मेमोरी इफेक्ट" नहीं.

प्रमुख चुनौतियाँ

  • वैश्विक सप्लाई चेन में असुरक्षा – चीन विश्व का लगभग 50% लिथियम एवं 70% बैटरी निर्माण नियंत्रित करता है.

  • भारत ने 2018-2022 तक US$ 1.2 बिलियन की Li-ion बैटरियाँ आयात कीं.

  • सुरक्षा संकट – इनमें ज्वलनशील इलेक्ट्रोलाइट होने के कारण गलती से विस्फोट का जोखिम है.

  • पर्यावरणीय प्रभाव – लिथियम खनन प्रक्रिया अत्यंत जल-गहन है (प्रति टन लिथियम पर 2,000 टन पानी).

  • बैटरी रीसायक्लिंग इकाइयों की कमी के कारण सुरक्षित निपटान एक बड़ी समस्या है.

EMC योजना (इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर)

  • 2012 में MeitY द्वारा शुरू – विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना

  • ग्रीनफील्ड क्लस्टर: परियोजना लागत का 50% (हर 100 एकड़ के लिए अधिकतम ₹50 करोड़)

  • ब्राउनफील्ड क्लस्टर: परियोजना लागत का 75% (प्रत्येक प्रोजेक्ट के लिए अधिकतम ₹50 करोड़)

निष्कर्ष

हरियाणा का नया संयंत्र भारत को लिथियम-आयन बैटरियों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाता है, आयात-निर्भरता घटाएगा, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा उद्योगों को मजबूती देगा और हज़ारों रोजगार के साथ आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगा#LithiumIon #BatteryManufacturing #MadeInIndia #CleanEnergy #ElectronicsHub #Haryana #SustainableFuture

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